Fateh film review: Sonu Sood की नई फिल्म फ़तेह ने भारतीय सिनेमा को एक नया दृष्टिकोण देने का प्रयास किया है। यह फिल्म दर्शकों को एक्शन और थ्रिल का शानदार अनुभव देने के लिए बनाई गई है। एनिमल, मार्को, किल और अब फ़तेह—ये सभी फिल्मों की एक कड़ी का हिस्सा लगती हैं, जो कहीं न कहीं हिंसा और एड्रेनालिन से भरपूर कहानी पर केंद्रित हैं।

आज की फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा लगता है कि एक नया ट्रेंड स्थापित हो चुका है, जहां स्क्रिप्ट और कहानी के बजाय एक्शन और हिंसा को प्राथमिकता दी जा रही है। हर नई फिल्म के साथ, मौत को दिखाने और हिंसा को पेश करने के नए-नए तरीके आजमाए जा रहे हैं। यह सवाल उठता है कि हमारी फिल्म industry इस दिशा में इतनी तेज़ी से कैसे बढ़ रही है।
फ़तेह में सोनू सूद ने देसी एक्शन को ग्लोबल फिनिश देने की कोशिश की है। फिल्म के स्टंट, सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक को देखकर साफ समझ आता है कि यह फिल्म दर्शकों को एक अलग अनुभव देने का प्रयास कर रही है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि दर्शक इस बदलाव को स्वीकारें और फिल्मों की कहानी और गहराई पर भी उतना ही ध्यान दें जितना कि एक्शन पर दिया जाता है।
यह फिल्म एक सवाल भी खड़ा करती है: क्या हम एक ऐसी पीढ़ी बन रहे हैं जो केवल तेज़ रफ्तार और हाई-ऑक्टेन एक्शन के लिए सिनेमा देखना चाहती है, या फिर हमें अपनी कहानियों की भावनात्मक गहराई में भी दिलचस्पी है? फ़तेह इस चर्चा के लिए एक शानदार शुरुआत हो सकती है।
🎥 #Fateh Movie Review 🎥#Fateh delivers what it promises – an action-packed thrill ride! #SonuSood doesn’t just direct but also stars, giving us a gripping tale of revenge and cybercrime. The action sequences are brutal and well-executed, with Sood’s performance being the… pic.twitter.com/ZaCJDNZgoY
— Snehal (@SnehalTweets) January 10, 2025
Fateh film review: Fateh फिल्म किस बारे में है?
Fateh film review: सोनू सूद की नई फिल्म “फतेह” एक रोमांचक और सामाजिक संदेश देने वाली कहानी पर आधारित है। यह कहानी फ़र्जी लोन ऐप्स और उनके कारण लोगों के जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के इर्द-गिर्द घूमती है। फ़र्जी ऐप्स के ज़रिए लोगों को आसानी से लोन देकर बाद में ऊंची ब्याज दरों पर परेशान किया जाता है।
फिल्म में सोनू सूद “Fateh Singh” की भूमिका निभा रहे हैं, जो एक पूर्व गुप्तचर एजेंट हैं और अपने अतीत में एक कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में काम कर चुके हैं। कहानी तब मोड़ लेती है जब पंजाब के उनके गाँव की एक लड़की लापता हो जाती है। फ़तेह सिंह उसे ढूंढने के लिए दिल्ली पहुंचते हैं, लेकिन यहाँ उन्हें पता चलता है कि यह मामला सिर्फ़ एक साधारण गुमशुदगी का नहीं है।
दरअसल, यह मामला एक बड़े और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसका नेतृत्व रज़ा (Naseeruddin Shah) कर रहे हैं। रज़ा और उनके गैंग के चंगुल से लड़की को बचाना और इस घोटाले का पर्दाफाश करना, फ़तेह की मुख्य चुनौती बन जाता है।
फिल्म की कहानी में रोमांच, एक्शन, और emotions का भरपूर तड़का है। “फतेह” न केवल एक मनोरंजक फिल्म है, बल्कि यह दर्शकों को फ़र्जी लोन ऐप्स और उनसे जुड़े खतरों के प्रति जागरूक भी करती है।
कहानी में साइबर अपराध को केंद्र में रखा गया है, लेकिन इसे किसी भी अन्य विषय से बदला जा सकता है, और इसका मुख्य कथानक पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह फिल्म मुख्य रूप से एक्शन दृश्यों पर केंद्रित है, जो हर कुछ मिनटों में खून-खराबे और हिंसा से भरपूर हैं। यहां तक कि कुछ दृश्य इतने क्रूर हैं कि वे असहज महसूस कराते हैं, जैसे कि एक व्यक्ति के मुंह में ड्रिल करना या किसी की आंखें निकालना।
इन तत्वों से यह स्पष्ट है कि फिल्म की कहानी में गहराई या नवाचार की कमी है। क्लाइमेक्स में तो और भी ज्यादा प्रभाव मिलता है कि यह रणबीर कपूर की फिल्म “एनिमल” के किरदार और उसकी शैली से प्रेरित है। हालांकि, एक्शन प्रेमियों के लिए यह एक दिलचस्प अनुभव हो सकता है, लेकिन कहानी में ठोस पकड़ की कमी इसे कमजोर बनाती है।
फ़तेह: एक्शन, निर्देशन और अभिनय का विश्लेषण
Fateh film review: सोनू सूद फ़िल्म “फ़तेह” में निर्देशन और मुख्य भूमिका दोनों को बखूबी संभालते हैं, लेकिन कहानी और पटकथा (जिसे उन्होंने अंकुर पन्नू के साथ मिलकर लिखा है) में नवीनता की कमी खटकती है। यह फ़िल्म आम एक्शन फिल्मों से हटकर कुछ नया करने की कोशिश करती है, लेकिन एक समय के बाद शानदार एक्शन दृश्यों का असर भी फीका पड़ने लगता है।
डिजिटल घोटाले जैसे संवेदनशील विषय को फ़िल्म में बहुत सतही और शौकिया तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, “फ़तेह” जागरूकता फैलाने के उद्देश्य का दावा करती है, लेकिन दर्शकों को इससे कोई खास जानकारी या नया दृष्टिकोण नहीं मिलता।
Jacqueliene Fernandez फ़िल्म में एक नैतिक हैकर की भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उनका किरदार गहराई और ताकत से रहित है। उनके अधिकांश दृश्य या तो रोने, चीखने या बचाव की प्रतीक्षा में बीतते हैं। शाह का किरदार फ़िल्म में बहुत ही सतही लगता है, और ऐसा प्रतीत होता है कि उनके हिस्से को बहुत जल्दबाजी में तैयार किया गया है।
Fateh film review: फिल्म फतेह एक्शन शैली में किसी बड़े बदलाव की कोशिश नहीं करती, लेकिन इसकी खासियत इसके अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रस्तुतीकरण में छिपी है। खासतौर पर एक्शन दृश्यों में जो बारीकी और तकनीकी उत्कृष्टता दिखाई गई है, वह दर्शकों को अपनी ओर खींचने में कामयाब होती है।
ये दृश्य न केवल बेहतरीन कोरियोग्राफी से सजे हैं, बल्कि उनमें एक ताजगी और वैश्विक दृष्टिकोण का एहसास भी होता है। फिल्म के इन तत्वों की वजह से यह न केवल एक्शन प्रेमियों के लिए बल्कि हर वर्ग के दर्शकों के लिए आकर्षक बनती है।